घायल हूँ तेरी नजरों से, जो दिल में उतरती हैं। तेरे दीदार को ना जाने, क्यों आंखें तरसती घायल हूँ तेरी नजरों से, जो दिल में उतरती हैं। तेरे दीदार को ना जाने, क्यों आं...
हरयाणवी कविता हरयाणवी कविता
चलो संभाल लेते है इस सृष्टि हो चलते हैं सफर पर मानवता के रथ पर। चलो संभाल लेते है इस सृष्टि हो चलते हैं सफर पर मानवता के रथ पर।
प्रेम थका मांदा अब पस्त हो चुका है राह तुम्हारी देखते देखते। प्रेम थका मांदा अब पस्त हो चुका है राह तुम्हारी देखते देखते।
हमने अपने भूत को भविष्य का कब्रिस्तान सजाते देखा है। हमने अपने भूत को भविष्य का कब्रिस्तान सजाते देखा है।
तुम्हारी आँखों में नमी जब भी देखता हूँ , हर बार खुद को व्याकुल पाता हूँ , क्यूं चहकार भी कह न पाता ह... तुम्हारी आँखों में नमी जब भी देखता हूँ , हर बार खुद को व्याकुल पाता हूँ , क्यूं ...